कार्यक्रम में महिला कार्य आयाम की प्रांत प्रमुख रेखा देशपांडे, प्रांत सदस्य अनीता सिंह एवं विभाग प्रमुख नीलिमा चावरे उपस्थित रहीं। उन्होंने प्रशिक्षणार्थियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए उन्हें हुनरमंद बनाने के साथ रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसरों से जोड़ना भी जरूरी है। सिलाई का कौशल महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता का एक बेहतर माध्यम बन सकता है।

प्रशिक्षण के बाद रोजगार से जोड़ने की पहल
प्रशिक्षण पूर्ण कर चुके पहले बैच की महिलाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ने के लिए महिला समूह गठित करने की योजना बनाई गई है। इसके माध्यम से महिलाएं सामूहिक रूप से थोक में कपड़ा खरीदकर सिलाई का कार्य करेंगी और तैयार वस्त्रों एवं अन्य उत्पादों का बाजार में विक्रय कर आय अर्जित कर सकेंगी। इससे महिलाओं को अपने हुनर का व्यावसायिक उपयोग करने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिलेगा।
इसके साथ ही महिलाओं को सिलाई के अलावा अन्य व्यावसायिक गतिविधियों से जोड़ने की भी योजना है। उनकी रुचि और स्थानीय जरूरतों के अनुरूप भविष्य में विभिन्न रोजगारपरक कौशलों का प्रशिक्षण शुरू करने की दिशा में प्रयास किए जाएंगे।
कार्यक्रम में जिला वनवासी विकास समिति के अध्यक्ष पवन कुमार गंगबोइर, सचिव कृष्णा साहू, जिला प्रमुख महिला आयाम रेनुका साहू, नगर प्रमुख संगीता देवांगन, कोषाध्यक्ष राजेश्वरी साहू, पुष्पा शांडिल्य, सुनीता भांडेकर, शिल्पी राय तथा प्रशिक्षण केंद्र की प्रशिक्षक संजीवनी भास्कर सहित महिला कार्य आयाम से जुड़ी महिलाएं एवं अन्य गणमान्यजन उपस्थित रहे।
वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा जनजातीय समाज के सर्वांगीण विकास के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य, स्वावलंबन एवं कौशल विकास के क्षेत्र में निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। रानी दुर्गावती सिलाई प्रशिक्षण केंद्र की यह पहल महिलाओं को हुनर प्रदान करने के साथ उन्हें रोजगार से जोड़कर आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है।













