
पुलिस विभाग के अनुसार यह मोबाइल फॉरेंसिक वैन 14 प्रकार की आधुनिक जांच किट और अत्याधुनिक उपकरणों से लैस है। इससे घटनास्थल पर मौजूद महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी और जांच में तकनीकी मजबूती आएगी। अधिकारियों का मानना है कि इससे अपराधियों तक पहुंचने में आसानी होगी और न्याय प्रक्रिया को भी गति मिलेगी।

पुलिस अधीक्षक योगेश कुमार पटेल ने बताया कि कई मामलों में घटनास्थल से साक्ष्य एकत्र करने में देरी या तकनीकी कमी के कारण जांच प्रभावित होती थी, लेकिन अब इस मोबाइल फॉरेंसिक वैन के माध्यम से मौके पर ही वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य सुरक्षित और परीक्षण किए जा सकेंगे। इससे जांच की गुणवत्ता में बड़ा सुधार आएगा और साक्ष्य खराब होने की संभावना भी कम होगी।

नगर पालिका अध्यक्ष प्रतिभा चौधरी ने इसे जिले की सुरक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण पहल बताते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों से सुसज्जित यह वैन पुलिस कार्यप्रणाली को नई मजबूती देगी। उन्होंने कहा कि तेजी से बदलते समय में तकनीकी संसाधनों का उपयोग बेहद जरूरी हो गया है और इससे आम लोगों को भी त्वरित सहायता एवं बेहतर सुरक्षा मिल सकेगी। उन्होंने बालोद पुलिस की सक्रिय कार्यशैली की सराहना भी की।

राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के उपाध्यक्ष यज्ञदत्त शर्मा ने कहा कि तकनीक आधारित पुलिसिंग वर्तमान समय की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने कहा कि इस तरह की सुविधाएं अपराध नियंत्रण के साथ-साथ जनता के भीतर न्याय व्यवस्था के प्रति भरोसा मजबूत करती हैं। वैज्ञानिक जांच प्रणाली से अपराधों के खुलासे में पारदर्शिता बढ़ेगी और जांच अधिक विश्वसनीय बनेगी।

वैज्ञानिक अधिकारी डॉ. स्मिता रानी भारदीय ने जानकारी देते हुए बताया कि वैन में क्राइम सीन जांच के लिए सभी आवश्यक आधुनिक किट्स उपलब्ध हैं। इनमें फिंगरप्रिंट जांच, फुटप्रिंट और टायर मार्क विश्लेषण, ब्लड और डीएनए सैंपल संग्रहण, नार्कोटिक्स जांच, विस्फोटक एवं आगजनी जांच, बैलिस्टिक परीक्षण सहित कई अत्याधुनिक सुविधाएं शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि वैन में माइक्रोस्कोप, DSLR कैमरा, बॉडी कैमरा, लैपटॉप-प्रिंटर, डिजिटल जांच किट, CCTV कैमरा, LED स्क्रीन, मिनी रेफ्रिजरेटर, बारकोड स्कैनर-प्रिंटर, जनरेटर और पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध हैं। इससे मौके पर ही डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और साक्ष्यों का सुरक्षित रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।
विशेषज्ञों के अनुसार इस तरह की मोबाइल फॉरेंसिक यूनिट बड़े शहरों के बाद अब जिलों तक पहुंच रही है, जिससे ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों में भी वैज्ञानिक जांच प्रणाली मजबूत होगी। इससे हत्या, चोरी, सड़क दुर्घटना, आगजनी और अन्य गंभीर अपराधों की जांच में तेजी आने की उम्मीद है।

कार्यक्रम के दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक मोनिका ठाकुर, नगर पुलिस अधीक्षक राजहरा विकास पाटले, डीएसपी राजेश बागड़े, डीएसपी श्रुति चक्रवर्ती, डीएसपी माया शर्मा, रक्षित निरीक्षक रेवती वर्मा सहित पुलिस विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।




















