जानकारी के अनुसार, परीक्षा केंद्र भक्त माता कर्मा कन्या महाविद्यालय में सुबह 9:30 बजे तक प्रवेश का अंतिम समय निर्धारित था। लेकिन कई परीक्षार्थी, जो दूर-दराज क्षेत्रों से परीक्षा देने पहुंचे थे, कुछ मिनट देरी से पहुंचने के कारण गेट पर ही रोक दिए गए। इनमें भानुप्रतापपुर सहित अन्य इलाकों से आए छात्र भी शामिल थे।
परीक्षार्थियों ने आरोप लगाया कि केंद्र में तैनात अधिकारियों और कर्मचारियों ने परिस्थितियों को समझने के बजाय सख्त रवैया अपनाया और मानवीय दृष्टिकोण नहीं दिखाया। छात्रों का कहना है कि वे लंबी दूरी तय कर समय पर पहुंचने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन मामूली देरी के चलते उन्हें परीक्षा से वंचित कर दिया गया। इससे उनका एक साल बर्बाद होने का खतरा पैदा हो गया है।

घटना की जानकारी मिलते ही जिले के अपर कलेक्टर एवं परीक्षा के नोडल अधिकारी श्री लकड़ा मौके पर पहुंचे। उन्होंने परीक्षार्थियों और उनके परिजनों से चर्चा कर उनकी शिकायतें सुनीं और आवेदन लेने के बाद पूरे मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया।
हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यही उठ रहा है कि क्या प्रभावित छात्रों को न्याय मिल पाएगा। क्या प्रशासन उनकी स्थिति को देखते हुए उन्हें दोबारा परीक्षा में शामिल होने का अवसर देगा या फिर नियमों की सख्ती के बीच उनकी मेहनत पर विराम लग जाएगा।
फिलहाल प्रशासनिक जांच के भरोसे बैठे छात्र और उनके परिजन निर्णय का इंतजार कर रहे हैं, लेकिन यह मामला परीक्षा व्यवस्था और संवेदनशीलता दोनों पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।




















