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अनोखी पहल..छत्तीसगढ़ पुलिस की ऐसी जैकेट करेगी ट्रैफिक पुलिस की मदद..चौक चौराहे के सिग्नल साथ कनेक्ट

दुर्ग, जिले में लगातार हो रहे हादसों को लेकर पुलिस पूरी तरह से एक्शन मोड पर है. बॉडी वार्म अप कैमरा, हाईटेक पेट्रोलिंग कार और अन्य उपकरणों के बाद पुलिस ने ऐसी जैकेट तैयार की है, जिससे दुर्घटनाओं को रोकने में पुलिस को काफी मदद मिलेगी.यह जैकेट क्या है? कैसे काम करता है!

जिले में पिछले 1 साल में हजारों हादसे हुए. इन हादसों में सैकड़ों लोगो ने अपनी जान गंवाई है.जिसको लेकर पुलिस समय-समय पर जागरूकता अभियान भी चला रही है, लेकिन फिर भी हादसों में कमी नहीं आ रही है.इसे देखते हुए दुर्ग पुलिस ने एक नया तरीका निकाला है.दुर्ग पुलिस ने एक ऐसी जैकेट बनाई है जो चौक चौराहे के सिग्नल के साथ कनेक्ट है.

जैकेट करेगी ट्रैफिक पुलिस की मदद

बता दें कि पूरे छत्तीसगढ़ में यह पहली जैकेट होगी जो ट्रैफिक पुलिस को मदद करेगी और हादसे भी रुकेंगे. पुलिस ने एक अनोखा जैकेट तैयार करवाया है.जिसके पहनने से यातायात व्यवस्था और भी दुरुस्त हो जाएगी ट्रांसमीटर और रिसीवर के माध्यम से य़ह जैकेट अपने आप सिग्नल से कनेक्ट होकर रंग बदल लेता हैं.जब सिग्नल रेड हैं तो जैकेट का रंग भी रेड हो जायेगा और ग्रीन है तो ग्रीन होगा.

गौरतलब है कि दुर्ग पुलिस दुर्घटना रोकने को लेकर लगातार काम कर रहीं है, लेकिन नियमों की अनदेखी और खस्ताहाल सड़क के कारण दुर्घटनाएं थमने का नाम नहीं ले रहीं हैं. अब एक ऐसे अनोखे जैकेट को तैयार किया गया है. जिसको पहनकर जब यातायात के जवान ड्यूटी कर रहे होंगे तब ये सिग्नल के अनुरूप ही अपना रंग परिवर्तित कर लेगा. इसी तरह से हैट मे भी लाइट और रिसीवर लगाया गया हैं.जो कि ट्रांसमीटर के हिसाब से सिग्नल देता रहेगा.


एसपी ने पहनी जैकेट

बता दें कि दुर्ग एसपी अभिषेक पल्लव ने इस जैकेट और हैट को पहनकर प्रयोग भी किया. एसपी पल्लव का कहना है कि य़ह यातायात के जवान को बकायदा प्रोटेक्शन देगी. साथ ही लोगों के लिए अवेयरनेस का काम भी करेगी. शुरुआती दौर में इसका मात्र परीक्षण ही किया गया हैं और ये सफल होगा तो सभी चौक-चौराहे में इसे नियमित रूप से लागू भी किया जाएगा.

जैकेट और टोपी बनाने में आया इतना खर्चा?
इस जैकेट और हैट को बनाने में महज 8,000 का खर्च आया है. सिग्नल के खंभों पर बकायदा एक रिसीवर बॉक्स लगाया गया है उस रिसीवर बॉक्स इस जैकेट की सेंसर कनेक्ट और उसके साथ-साथ एक रिमोट डिवाइस भी जैकेट पहनने वाले जवान के पास होगा.जो कि चार्जेबल होगा डेढ़ घंटे का चार्ज है. पूरे 24 घंटे तक यह जैकेट काम करेगी. इस जैकेट को बीआईटी कॉलेज के इलेक्ट्रिकल्स डिपार्टमेंट के प्रोफेसर श्रीनिवास ने तैयार किया है.हालांकि पुलिस मैनुअल या फिर मुख्यालय से इस तरह की कोई व्यवस्था नहीं की गई है ,लेकिन दुर्ग पुलिस के इस अनूठे प्रयास को निश्चित तौर पर साराहा जरूर जा सकता है.

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