रायपुर/जगदलपुर। बस्तर संभाग में कांग्रेस ने अपने संगठन को जमीनी स्तर पर अधिक सक्रिय और वैचारिक रूप से तैयार करने की दिशा में कवायद तेज कर दी है। जगदलपुर के गणपति रिजॉर्ट में चल रहे ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स के तीन दिवसीय प्रशिक्षण शिविर के दूसरे दिन संगठनात्मक मजबूती के साथ-साथ वैचारिक स्पष्टता, सोशल मीडिया की रणनीति और बस्तर के स्थानीय मुद्दों पर व्यापक मंथन हुआ।
शिविर की गतिविधियों को महज प्रशिक्षण कार्यक्रम के तौर पर देखने के बजाय कांग्रेस की आगामी राजनीतिक रणनीति की तैयारी के रूप में भी देखा जा रहा है। पार्टी ने इस दौरान ब्लॉक स्तर के नेतृत्व को राजनीतिक विमर्श, संगठन संचालन और आधुनिक संचार माध्यमों के इस्तेमाल से जोड़ने पर जोर दिया। खासतौर पर बस्तर जैसे राजनीतिक रूप से संवेदनशील और मुद्दा-प्रधान क्षेत्र में जमीनी संगठन को सक्रिय करना कांग्रेस की प्राथमिकताओं में दिखाई दिया।

धर्म और राजनीति के सवाल पर वैचारिक स्पष्टता
दूसरे दिन पूर्व मुख्यमंत्री और एआईसीसी महासचिव भूपेश बघेल ने धर्म, राजनीति और धर्मनिरपेक्षता से जुड़े मुद्दों पर कार्यकर्ताओं से संवाद किया। उन्होंने इन विषयों को लेकर राजनीतिक एजेंडे, भ्रम और मिथकों के बीच अंतर स्पष्ट करने की कोशिश की और संवैधानिक मर्यादाओं के भीतर राजनीतिक कार्यकर्ता की भूमिका को रेखांकित किया।
कांग्रेस के लिए यह विषय इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि मौजूदा राजनीतिक परिदृश्य में धर्म और राष्ट्रवाद से जुड़े मुद्दे चुनावी विमर्श के केंद्र में बने हुए हैं। ऐसे में पार्टी अपने जमीनी कार्यकर्ताओं को वैचारिक आधार पर तैयार कर राजनीतिक बहस का सामना करने की रणनीति पर काम करती नजर आ रही है।

संगठन के साथ सोशल मीडिया को भी हथियार बनाने की तैयारी
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने संगठनात्मक भूमिका और जिम्मेदारियों के साथ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के प्रभावी इस्तेमाल की बारीकियों पर चर्चा की। इसका संकेत साफ है कि कांग्रेस अब पारंपरिक संगठनात्मक ढांचे के साथ डिजिटल नेटवर्क को भी समान महत्व देना चाहती है।
वहीं पूर्व मंत्री ताम्रध्वज साहू ने संगठनात्मक विषयों पर विचार रखे। पूर्व प्रदेश अध्यक्ष और पूर्व मंत्री मोहन मरकाम ने छत्तीसगढ़ के महापुरुषों और स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर देश के नव निर्माण तक उनके योगदान पर प्रकाश डालते हुए कार्यकर्ताओं को प्रदेश के राजनीतिक और सामाजिक इतिहास से जोड़ने का प्रयास किया।

बस्तर के मूल सवालों को राजनीतिक एजेंडे के केंद्र में रखने की रणनीति
एआईसीसी सचिव राजेश तिवारी के सत्र में बस्तर के स्थानीय और लंबे समय से चले आ रहे मुद्दे प्रमुखता से सामने आए। जल, जंगल और जमीन के अधिकार, पेसा कानून तथा स्थानीय विकास से जुड़े विषयों पर विस्तृत चर्चा हुई।
बस्तर की राजनीति में इन मुद्दों की अपनी विशिष्ट संवेदनशीलता है। आदिवासी अधिकार, प्राकृतिक संसाधनों पर स्थानीय समुदायों की भागीदारी और विकास की दिशा यहां लंबे समय से राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। कांग्रेस का प्रशिक्षण शिविर इन सवालों को संगठन के निचले स्तर तक ले जाने और कार्यकर्ताओं को इनके राजनीतिक एवं संवैधानिक पक्षों से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
मीडिया मैनेजमेंट से लेकर बूथ नेटवर्क तक फोकस
प्रदेश कांग्रेस संचार प्रमुख सुशील आनंद शुक्ला ने मीडिया और सोशल मीडिया मैनेजमेंट पर इंटरेक्टिव सेशन लिया। डिजिटल मीडिया तकनीक और जमीनी संगठन के बीच बेहतर समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।
कांग्रेस की चुनौती केवल राजनीतिक संदेश तैयार करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उस संदेश को बूथ और ब्लॉक स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाना भी है। इसी दृष्टि से कनेक्ट सेंटर के चेयरमैन दीपक मिश्रा ने ब्लॉकों के साथ कनेक्ट सेंटर के जुड़ाव और उसकी कार्यप्रणाली पर चर्चा की। इससे संगठन के भीतर सूचना के तेज आदान-प्रदान और केंद्रीय नेतृत्व से स्थानीय इकाइयों के बेहतर समन्वय की दिशा में पार्टी की कोशिश का संकेत मिलता है।

प्रशिक्षण से आगे बढ़कर रणनीतिक संवाद
शिविर में समूह चर्चा और प्रश्नोत्तरी सत्र भी आयोजित किए गए। इनमें ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्षों और मास्टर ट्रेनर्स ने संगठन विस्तार, स्थानीय अनुभव और जमीनी चुनौतियों से जुड़े सुझाव साझा किए।
इस पूरी कवायद का व्यापक राजनीतिक संकेत यह है कि कांग्रेस बस्तर में केवल चुनावी समय पर सक्रिय होने के बजाय संगठन को लगातार सक्रिय रखने की दिशा में काम कर रही है। वैचारिक प्रशिक्षण, स्थानीय मुद्दों की समझ, डिजिटल संचार और ब्लॉक स्तर के नेटवर्क को एक साथ जोड़ने की कोशिश पार्टी की दीर्घकालिक संगठनात्मक रणनीति का हिस्सा दिखाई देती है।
कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी महामंत्री मलकीत सिंह गैदु, प्रशिक्षण प्रभारी युगल पांडे, बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल, सिहावा विधायक अंबिका मरकाम, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष सुशील मौर्य, ग्रामीण अध्यक्ष प्रेम शंकर शुक्ला, पूर्व विधायक रेखचंद जैन, पूर्व विधायक चंदन कश्यप तथा कनेक्ट सेंटर के को-चेयरमैन अशोक चतुर्वेदी सहित अन्य नेता और पदाधिकारी मौजूद रहे।
राजनीतिक तौर पर देखें तो बस्तर में कांग्रेस का यह प्रशिक्षण शिविर संगठन को केवल चुनावी मशीनरी के रूप में तैयार करने के बजाय उसे वैचारिक, डिजिटल और स्थानीय मुद्दों पर सक्षम बनाने की कोशिश है। अब इसकी वास्तविक परीक्षा इस बात से होगी कि प्रशिक्षण में तैयार की गई रणनीति कितनी प्रभावी ढंग से ब्लॉक, बूथ और गांवों तक पहुंचती है।













