बालोद। राष्ट्रीय राजमार्ग-30 पर वाहनों की जांच और चालानी कार्रवाई को लेकर एक बार फिर परिवहन विभाग की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में है। रविवार को पुरूर थाना क्षेत्र के मुजालगोंदी में आरटीओ उड़नदस्ता की कार्रवाई के विरोध में ट्रक चालकों ने हाईवे पर वाहन खड़े कर करीब तीन घंटे तक चक्काजाम कर दिया। चालकों ने उड़नदस्ता के कर्मचारियों पर वाहन का पीछा कर जबरन रोकने, गाली-गलौज और मारपीट करने के साथ दस्तावेज अपने कब्जे में लेने तथा एंट्री के नाम पर रकम मांगने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
घटना के बाद बालोद, धमतरी और कांकेर क्षेत्र के परिवहन संघों के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। देखते ही देखते मामला सड़क पर विरोध-प्रदर्शन में बदल गया। जाम के कारण रायपुर-जगदलपुर मार्ग पर दोनों ओर कई किलोमीटर तक वाहनों की कतार लग गई। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की समझाइश के बाद आंदोलन समाप्त हुआ, लेकिन इस घटना ने हाईवे पर आरटीओ जांच की पारदर्शिता और कथित एंट्री व्यवस्था को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं।

डेढ़ किलोमीटर पीछा… फिर सामने गाड़ी लगाकर रोकने का आरोप
धमतरी निवासी ट्रक चालक पिंटू साहू के अनुसार वह आयशर वाहन से रायपुर से कांकेर की ओर गैरेज का सामान लेकर जा रहा था। उसका आरोप है कि आरटीओ उड़नदस्ता की टीम ने करीब डेढ़ किलोमीटर तक उसके वाहन का पीछा किया और फिर अचानक सामने वाहन खड़ा कर उसे रोक दिया।
पिंटू का कहना है कि एंट्री को लेकर पूछताछ के दौरान विवाद हुआ। इसके बाद उसके साथ कथित तौर पर गाली-गलौज और मारपीट की गई तथा वाहन से संबंधित बिल्टी भी ले ली गई। चालक के आरोपों ने यह सवाल खड़ा किया है कि यदि वाहन की जांच नियमानुसार की जा रही थी तो कार्रवाई की पूरी प्रक्रिया क्या थी और दस्तावेज लेने की स्थिति क्यों बनी?
कॉलर पकड़कर नीचे उतारने का दावा, दो हजार रुपये मांगने का आरोप
दूसरे चालक विकास यादव ने भी उड़नदस्ता की कार्रवाई पर गंभीर आरोप लगाए। उसके मुताबिक वह रायपुर से कोंडागांव की ओर स्कूल का सामान लेकर जा रहा था। टोल नाका के पास उड़नदस्ता वाहन ने पीछा कर उसे रोका।
विकास का आरोप है कि एक कर्मचारी ने उसका कॉलर पकड़कर वाहन से नीचे उतारा और गाली-गलौज की। इसके बाद एंट्री के नाम पर कथित रूप से दो हजार रुपये की मांग की गई। रकम नहीं देने पर वाहन की बिल्टी अपने साथ ले जाने का आरोप भी चालक ने लगाया है। विकास ने दावा किया कि घटनाक्रम का कुछ हिस्सा उसने मोबाइल में रिकॉर्ड किया है।
300 से 2000 रुपये तक कथित एंट्री का आरोप
कांकेर क्षेत्र के यूनियन पदाधिकारी याकूब गोरी ने आरोप लगाया कि एनएच-30 पर लंबे समय से ट्रक चालकों से एंट्री के नाम पर कथित रूप से रकम लिए जाने की शिकायतें सामने आती रही हैं। उनके अनुसार अलग-अलग स्थानों पर 300 से 2000 रुपये तक की रकम लिए जाने का आरोप है।

यूनियन पदाधिकारी का दावा है कि इस कथित राशि के बदले कोई विधिवत रसीद नहीं दी जाती, बल्कि रजिस्टर में वाहन की एंट्री दर्ज किए जाने की बात कही जाती है। उनका आरोप है कि रकम देने से इनकार करने पर वाहनों में छोटी-छोटी कमियां निकालकर कार्रवाई या भारी चालान की धमकी दी जाती है।
हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। यही वजह है कि अब जांच में यह स्पष्ट होना महत्वपूर्ण होगा कि कथित एंट्री की व्यवस्था वास्तव में क्या है, राशि किस आधार पर ली जाती है और यदि चालानी कार्रवाई हुई तो उसकी विधिक प्रक्रिया क्या रही।
हाईवे पर कार्रवाई के कई ठिकानों को लेकर भी सवाल
परिवहन संघ पदाधिकारियों ने दावा किया कि उड़नदस्ता की टीमें एनएच-30 के अलग-अलग हिस्सों में नियमित रूप से वाहनों की जांच करती हैं। यूनियन ने मरकाटोला घाट, टोल नाका, जगतरा मंदिर और चिटौद सहित कई स्थानों का उल्लेख करते हुए वहां वाहन चालकों से कथित वसूली की शिकायतें होने का दावा किया है। यूनियन का कहना है कि पूर्व में भी इस संबंध में प्रशासन और शासन स्तर पर शिकायतें की गईं, लेकिन अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने से चालकों में असंतोष बढ़ता गया। रविवार को दो चालकों से कथित दुर्व्यवहार की घटना सामने आने के बाद यह नाराजगी खुलकर सड़क पर आ गई।

तीन घंटे तक थमा रहा रायपुर-जगदलपुर मार्ग
सुबह करीब आठ बजे ट्रक चालकों ने अपने वाहन हाईवे पर खड़े कर दिए। देखते ही देखते रायपुर और जगदलपुर दोनों दिशाओं में वाहनों की लंबी कतार लग गई। मालवाहक वाहनों के साथ यात्री बसें, कारें और अन्य छोटे वाहन भी जाम में फंस गए।
सूचना मिलने पर पुरूर पुलिस के साथ जिला मुख्यालय से पुलिस एवं यातायात विभाग की टीम मौके पर पहुंची। एएसपी चंद्रकांत गवर्णा, डीएसपी विनय कुमार सहित अधिकारियों ने यूनियन पदाधिकारियों और चालकों से बातचीत की। करीब तीन घंटे बाद समझाइश के बाद जाम हटाया गया और यातायात बहाल कराया गया।
आरटीओ अधिकारी ने आरोपों को बताया निराधार
दुर्ग उड़नदस्ता के निरीक्षक संतोष हरिपाल ने ट्रक चालकों द्वारा लगाए गए अवैध वसूली के आरोपों को निराधार बताया। उनका कहना है कि वाहनों पर नियमानुसार की गई चालानी कार्रवाई को ही चालक अवैध वसूली बता रहे हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि घटनाक्रम की जांच की जाएगी। एएसआई राजेंद्र पटेल और नगर सैनिक चुरामन साहू पर आरोप लगाए गए हैं। जांच में यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
अब जांच से तय होगा—चालान की कार्रवाई या कथित एंट्री का खेल?
पूरे घटनाक्रम में सबसे बड़ा सवाल यही है कि हाईवे पर ट्रकों को रोकने और दस्तावेज लेने की कार्रवाई किस नियम और प्रक्रिया के तहत हुई? यदि यह नियमित चालानी कार्रवाई थी तो उसकी पूरी जानकारी और दस्तावेज सामने आने चाहिए। वहीं यदि ट्रक चालकों के आरोप सही हैं तो एंट्री के नाम पर कथित रकम मांगने और दुर्व्यवहार की शिकायतों की निष्पक्ष जांच जरूरी होगी।
फिलहाल परिवहन संघ ने चेतावनी दी है कि यदि आरोपों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। ऐसे में अब पुलिस की जांच, आरटीओ विभाग की आंतरिक जांच और ट्रक यूनियन द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले साक्ष्य इस पूरे विवाद की दिशा तय करेंगे।













