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लोहारा में मनाई गई लोकमाता अहिल्याबाई की जयंती, स्वच्छता अभियान का हुआ कार्यक्रम

बालोद/ डौंडीलोहारा। डौंडीलोहारा में विगत दोनों लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर की जयंती मनाई गई। इस अवसर पर भाजपा संगठन द्वारा विविध कार्यक्रम आयोजित किया गया। जहां एक ओर स्वच्छता कार्यक्रम का आयोजन हुआ तो वही भाजपाई अहिल्याबाई होलकर के इतिहास से परिचित हुए और जन-जन तक उनकी गाथा को पहुंचाने की बात कही। इस आयोजन के दौरान शीतला मंदिर के पास तालाब की साफ सफाई भी भाजपाइयों द्वारा की गई। इस अवसर पर भाजपा मंडल डौंडीलोहारा की अध्यक्ष कुसुम शर्मा ने कहा कि लोकमाता मालवा की महारानी अहिल्या बाई होलकर के 300 वी जयंती पर यह आयोजन किया गया। उन्होंने लोकहित में अनेक मूलभूत सुविधा के कार्य किये। उनके अदम्य साहस और वीरता की गाथा आज भी मालवा क्षेत्र में याद कर उनकी पूजा की जाती है भारतीय संस्कृति को सहेजने वाली धर्मपरायण महिला अहिल्या बाई होलकर को मालवा सहित मध्यक्षेत्र में माता स्वरूप माना जाता है उन्हें क्षेत्र में लोकमाता का दर्जा प्राप्त है तथा उनकी अनेक मंदिर बनवाये तथा उनकी मूर्ति स्थापित है जिसकी पूजा वहां की जनता करती है ।

भाजपा के जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने भी कहा कि भारत में कई वीरांगनाओं ने जन्म लिया परंतु भूपटल पर अमिट छाप छोड़ने वाली अहिल्याबाई होल्कर एक महान मराठा शासिका थीं, जिन्होंने 1767 से 1795 तक मालवा क्षेत्र पर शासन किया। वे एक कुशल शासक, कुशल प्रशासक और एक परोपकारी के रूप में जानी जाती हैं। अहिल्याबाई का जन्म 31 मई 1725 को महाराष्ट्र के चौडी गांव में हुआ था, और उनका निधन 13 अगस्त 1795 को इंदौर में हुआ। वे अपने शासनकाल में मालवा क्षेत्र में हजारों कुएं तालाब और बावड़ी बनवाये और जल संचय का कार्य किया । उन्होंने मुगलों के द्वारा तोड़े गए अनेक मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया और नए मंदिर भी बनवाये। वहीं नारी शिक्षा और किसानों की आय बढ़ाने जैसे अनेक लोकहित के कार्य उन्होंने किये ।

आयोजन में शामिल भाजपाइयों ने लोकमाता अहिल्याबाई होल्कर को याद करते हुए कहा कि अहिल्याबाई का जन्म एक किसान परिवार में हुआ था. उनके पिता का नाम मनकोजी शिंदे था, जो अपने गांव के पाटिल थे. 12 वर्ष की उम्र में उनका विवाह मल्हार राव होलकर के पुत्र खंडेराव से हुआ पति की मृत्यु के बाद, अहिल्याबाई विधवा हो गईं और उन्होंने अपने राज्य की देखभाल करना शुरू किया जीवन में उन्होंने इतने संघर्ष किया उनके लिए कहा जा सकता है पुरुषार्थ केवल पुरुष ही नहीं करते नारी भी पुरुषार्थ करने में किसी से कम नहीं। उनकी न्यायप्रियता इतनी थी कि आसपास के राजा भी उनसे सलाह लेने आते थे। उन्होंने अपने पुरुषार्थ से अनेक राजाओं को पराजित किया। पर दुर्भाग्य है कि ऐसी भारतीय वीरांगना को इतिहास से मिटाने का कुकृत्य कार्य यहां के इतिहासकारों ने किया है। जो निंदनीय है ।नारी शक्ति का वास्तविक सुशासन की पुरोधा रही। जिनका पुरा जीवन समाजिक सुधार सुशासन की अवधारणा को धरातल पर साकार करने और संस्कृति पुनर्जागरण के लिए समर्पित रहा । जिला अध्यक्ष चेमन देशमुख ने कहा 300 वर्ष बाद पुण्यश्लोक लोक माता अहिल्याबाई होल्कर के बारे में जानने का सौभाग्य मिल रहा है। उनके जीवन की प्रेरणा जन-जन तक पहुंचे इस हेतु कार्यक्रम की रचना हुई है।इस अवसर पर जिलाध्यक्ष चेमन देशमुख, यशवंत जैन, मंडल अध्यक्ष कुसुम शर्मा, डौंडी लोहारा नगर पंचायत अध्यक्ष लाल निवेंद्र सिंह टेकाम, महामंत्री दुष्यंत गिरी गोस्वामी सोमेंद देशमुख मंडल उपाध्यक्ष संदीप लोढा अध्यक्ष जनभागीदारी जसराज शर्मा, कोषाध्यक्ष मोहन निषाद मंत्री धर्मेंद्र निषाद पलास गुप्ता धीरज जैन पार्षद सूर्य कला, ममता यादव, रेवती कोलियारे, दिलीप बाफना उत्तम मालेकर हिरेन्द गायकवाड़ बीरसिह ठाकुर प्रणव साहू पुनीत देशमुख देव देवांगन प्रीतम साहू प्रणब साहू धन्नू यादव निखिल शर्मा लोकेश दुबे गिरधारी आदि मौजूद रहे।

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