पुलिस के अनुसार, शिकायतकर्ता साजिद खान ने थाना सुपेला में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में आरोप लगाया गया कि संजय चौहान ने चौहान प्लाजा स्थित दुकान क्रमांक 110 और 111 की बिक्री के लिए अपने भाई अजय चौहान के नाम से कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। इन दस्तावेजों के आधार पर दुकानों का सौदा किया गया और शिकायतकर्ता से अलग-अलग किश्तों में नकद एवं बैंक माध्यम से कुल 28 लाख रुपये प्राप्त किए गए।

न्यायालयीन रोक के बावजूद बिक्री का मामला
इस मामले में न्यायालयीन आदेश से जुड़ा पहलू भी सामने आया है। पुलिस की प्रेस विज्ञप्ति के मुताबिक, संबंधित दुकानों के क्रय-विक्रय पर 8 मार्च 2001 को बिलासपुर स्थित उच्च न्यायालय द्वारा रोक लगाए जाने का तथ्य अभिलेखों में उल्लेखित था। दुकानों की बिक्री के लिए अजय चौहान के अनापत्ति प्रमाण पत्र की आवश्यकता से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की गई।
जांच के दौरान पुलिस को कथित तौर पर यह तथ्य मिले कि आरोपी ने अपने भाई के नाम से फर्जी लेटरपैड तैयार कर अनापत्ति प्रमाण पत्र पर कूटरचित हस्ताक्षर किए और 23 अक्टूबर 2019 को दोनों दुकानों का विक्रय किया। इस सौदे में शिकायतकर्ता से कुल 28 लाख रुपये प्राप्त किए जाने का आरोप है।
शिकायत की जांच के बाद दर्ज हुआ मामला
शिकायत और उपलब्ध दस्तावेजों की जांच के बाद सुपेला पुलिस ने अपराध क्रमांक 1601/2026 के तहत भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 468 में मामला दर्ज किया। इसके बाद संजय चौहान, उम्र 47 वर्ष, निवासी शास्त्री नगर, भिलाई, थाना वैशाली नगर, जिला दुर्ग को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया। पुलिस की कार्रवाई में थाना प्रभारी एस.एन. सिंह, उप निरीक्षक धनेश्वर साहू, प्रधान आरक्षक उपेन्द्र सिंह तथा आरक्षक धर्मेन्द्र सूर्यवंशी और अजित यादव की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
संपत्ति के सौदों में दस्तावेजों की जांच जरूरी
यह मामला व्यावसायिक संपत्तियों की खरीद-बिक्री में दस्तावेजों की वैधता, अनापत्ति प्रमाण पत्र और न्यायालयीन आदेशों की जांच के महत्व को सामने लाता है। दुर्ग पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि किसी भी संपत्ति का सौदा करने से पहले स्वामित्व संबंधी दस्तावेजों, अनापत्ति प्रमाण पत्र और न्यायालयीन प्रतिबंधों की विधिवत जांच करें। धोखाधड़ी या फर्जी दस्तावेजों की जानकारी मिलने पर तत्काल पुलिस को सूचित करें।













