पथराटोला में प्रस्तावित परियोजना की लागत, फंडिंग और स्वीकृति प्रक्रिया की स्वतंत्र जांच की मांग, जांच पूरी होने तक निर्माण रोकने का आग्रह
बालोद। संजारी बालोद विधानसभा क्षेत्र के जनसेवक राकेश कुमार यादव ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर डौंडी विकासखंड के ग्राम पथराटोला में लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से प्रस्तावित विज्ञान केंद्र के निर्माण पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। उन्होंने परियोजना की लागत, वित्तपोषण, स्वीकृति प्रक्रिया और जनोपयोगिता की स्वतंत्र जांच कराने की मांग करते हुए कहा है कि जांच पूरी होने तक निर्माण संबंधी आगे की कार्रवाई स्थगित रखी जाए।
यादव ने पत्र में कहा कि डौंडी आदिवासी बहुल और खनन प्रभावित क्षेत्र है, जहां कई गांवों के लोग आज भी सुरक्षित पेयजल, लाल पानी की समस्या, खराब सड़कों, नालियों, जल निकासी और रोजगार जैसी बुनियादी जरूरतों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ऐसे में बड़ी निर्माण परियोजनाओं को प्राथमिकता देने से पहले स्थानीय जरूरतों और उनसे मिलने वाले प्रत्यक्ष लाभ का आकलन जरूरी है।
लागत और DMF निधि के उपयोग पर सवाल
राकेश यादव ने विज्ञान केंद्र की अनुमानित लागत, प्रशासनिक एवं तकनीकी स्वीकृति और वित्तपोषण के स्रोत को सार्वजनिक करने की मांग की है। उन्होंने यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि परियोजना में जिला खनिज न्यास (DMF/DMFT) की राशि का उपयोग किया जा रहा है या किसी अन्य मद से धन उपलब्ध कराया जा रहा है। यदि DMF निधि का उपयोग प्रस्तावित है, तो खनन प्रभावित गांवों की बुनियादी जरूरतों के मुकाबले परियोजना की प्राथमिकता और औचित्य की समीक्षा की जाए। साथ ही DPR, लागत अनुमान, निविदा प्रक्रिया और कार्य आवंटन में नियमों के पालन की जांच भी हो।
लाल पानी की समस्या और बुनियादी सुविधाओं को प्राथमिकता
पत्र में डौंडी क्षेत्र के प्रभावित गांवों में लाल रंग के पानी की समस्या को गंभीर बताते हुए जल स्रोतों और पेयजल के नमूनों की वैज्ञानिक जांच कराने की मांग की गई है। यादव ने जांच रिपोर्ट के आधार पर पानी की गुणवत्ता निर्धारित करने तथा जरूरत के अनुसार वैकल्पिक जल स्रोत, जल शोधन व्यवस्था और स्थायी समाधान के लिए समयबद्ध कार्ययोजना बनाने पर जोर दिया है।
उन्होंने खनन प्रभावित एवं आदिवासी गांवों में सड़क, नाली, जल निकासी, स्वच्छता और अन्य नागरिक सुविधाओं का गांववार सर्वेक्षण कराने की मांग भी की। इसके आधार पर जरूरतमंद गांवों में प्राथमिकता से विकास कार्य कराने के साथ स्थानीय युवाओं के लिए कौशल विकास, स्वरोजगार और रोजगारोन्मुख योजनाओं को प्रभावी बनाने की बात कही।
चयन प्रक्रिया और संचालन व्यवस्था की भी जांच हो
राकेश यादव ने विज्ञान केंद्र की योजना के चयन, स्वीकृति और कार्य आवंटन की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए संभावित हितों के टकराव की भी पड़ताल करने का आग्रह किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि बिना जांच किसी अधिकारी या व्यक्ति को दोषी ठहराना उनका उद्देश्य नहीं है, बल्कि सार्वजनिक धन के उपयोग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है। अनियमितता या नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाए।
इसके अलावा उन्होंने निर्माण के बाद विज्ञान केंद्र के संचालन, बिजली, उपकरणों के रखरखाव, कर्मचारियों और वार्षिक खर्च के लिए बजट की व्यवस्था स्पष्ट करने की मांग की है, ताकि केंद्र का नियमित उपयोग हो और स्थानीय विद्यार्थियों एवं युवाओं को वास्तविक लाभ मिल सके।
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मुख्यमंत्री से लिखित कार्रवाई की मांग
यादव ने मुख्यमंत्री से जांच पूरी होने तक निर्माण कार्य रोकने, परियोजना की लागत एवं वित्तपोषण की स्वतंत्र जांच कराने और खनन प्रभावित गांवों में पेयजल, सड़क, नाली, स्वच्छता तथा रोजगार संबंधी कार्यों को प्राथमिकता देने के निर्देश जारी करने का आग्रह किया है। उन्होंने शिकायत पर हुई कार्रवाई, जांच की समयसीमा और अंतिम निर्णय की जानकारी लिखित रूप में देने की मांग भी की है।
उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य विज्ञान शिक्षा का विरोध करना नहीं, बल्कि विकास योजनाओं में स्थानीय जनता की वास्तविक जरूरतों को प्राथमिकता दिलाना है। सार्वजनिक धन का उपयोग ऐसी योजनाओं में होना चाहिए, जिनसे खनन प्रभावित आदिवासी परिवारों के जीवन स्तर में सुधार आए और उन्हें प्रत्यक्ष एवं दीर्घकालीन लाभ मिले।
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